बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से देश पुर्तुगलपुर (Portugal) में एक बहादुर नाविक रहता था, जिसका नाम वासु दा था। वासु दा का पूरा नाम वासु दा गामा था, लेकिन उसके दोस्त उसे प्यार से सिर्फ वासु दा बुलाते थे। वासु दा को समुद्र से बहुत प्यार था, और वो दुनिया के दूर-दराज़ के देशों को देखना चाहता था। एक दिन, वासु दा ने सुना कि एक अनोखी जगह है जिसका नाम भारतपुर है। वहाँ मसाले हैं जो खुशबू से भरपूर होते हैं, रंग-बिरंगे कपड़े हैं और बहुत ही अच्छे लोग रहते हैं। उसने ये सब सुनकर ठान लिया कि वो भारतपुर ज़रूर जाएगा। भारतपुर के बारे में सोचकर उसके मन में एक चमक-सी आ गई। उसने अपने दोस्तों से कहा, "दोस्तों, चलो भारतपुर चलते हैं! वहाँ की चीज़ें देखकर हमें बहुत मज़ा आएगा और हम उन्हें अपने देश ले जाएंगे।" उसके सबसे करीबी दोस्त, मन्नू , ने कहा, भारतपुर तो बहुत दूर है, और समुद्र में तूफ़ान भी आ सकते हैं। क्या तुम तैयार हो?" वासु दा ने मुस्कुराते हुए कहा, "हां, अगर हम दिल से चाहें तो कोई भी सफर मुश्किल नहीं ...
बहुत समय पहले की बात है, बहादुर नाविक *वासु दा* और उसके दोस्त भारतपुर के सुंदर शहर में पहुँचे थे। जैसे ही वे वहाँ पहुँचे, उनके दोस्त बने राजा *ज़मरिया* ने उन्हें भारतपुर का सबसे मशहूर और रंग-बिरंगा बाज़ार दिखाने का वादा किया। अगली सुबह, राजा ज़मरिया मुस्कुराते हुए बोले, “चलो, मैं तुम्हें हमारे भारतपुर का अनोखा बाज़ार दिखाऊँगा। वहाँ की चीजें तुम्हें हैरान कर देंगी!” वासु दा और उसके दोस्त खुश होकर उनके साथ चल पड़े। जैसे ही वे बाज़ार में पहुँचे, उन्हें रंग-बिरंगे कपड़े, सुगंधित मसाले, और गहनों की दुकानें दिखीं। वहाँ की महक से ही वासु दा और उसके दोस्तों का मन खिल उठा! पहली दुकान पर उन्हें एक मसालेदार काली मिर्च की दुकान मिली, जहाँ *कालिया मसालेदार* नाम का एक हंसमुख व्यापारी खड़ा था। उसने कहा, “यह हमारी काली मिर्च है, जो बहुत खास है! इसे दूर-दूर के देश *अरीबिया* के व्यापारी यहाँ से खरीदकर ले जाते हैं और ऊँचे दाम पर बेचते हैं।” वासु दा ने हैरानी से पूछा, “अरीबिया के व्यापारी ये मसाले यहाँ से क्यों ले जाते हैं? क्या वो अपने देश में नहीं उगा सकते?” राजा ज़मरिया ने मुस्कुराते हुए बताया, “व...
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