कहानी 3: "वासु दा की वापसी और अलमा दा का आगमन

जब बहादुर नाविक *वासु दा* ने भारतपुर से अनमोल मसाले और सुंदर कपड़े लेकर अपने देश पुर्तुगलपुर (Portugal) की ओर रुख किया, तो उसकी कहानी वहां पहुंचने से पहले ही मशहूर हो गई। वहां के लोग भारतपुर के इन अद्भुत मसालों और कपड़ों से इतने प्रभावित हुए कि उसके राजा ने सोचा, "अगर हम लगातार भारतपुर से व्यापार कर सकें, तो कितना अच्छा होगा!" 


इसलिए कुछ समय बाद, राजा ने अपने सबसे साहसी और समझदार नाविक को भारतपुर भेजने का फैसला किया। इस नए यात्री का नाम था *अलमा दा*। अलमा दा ने अपने जहाज का नाम रखा *राफेल*, और उसके साथ उसके कई दोस्त और पुर्तगालपुर से भारतपुर के लिए खास तोहफे भी थे। 


**अलमा दा का भारतपुर का सफर**


जब *अलमा दा* भारतपुर पहुँचा, तो राजा *ज़मरिया* ने उसे अपने महल में बुलाया। राजा ज़मरिया ने अलमा दा का स्वागत करते हुए पूछा, "तो तुम यहाँ क्यों आए हो, अलमा दा?" 


अलमा दा ने विनम्रता से कहा, "महाराज, मैं पुर्तगालपुर से आया हूँ और आपके साथ दोस्ती और व्यापार बढ़ाना चाहता हूँ। मेरा राजा चाहता है कि भारतपुर और पुर्तगालपुर के लोग एक-दूसरे के अच्छे मित्र बनें और मिलकर व्यापार करें।"


राजा ज़मरिया ने उसे ध्यान से सुना, लेकिन उन्होंने उसे याद दिलाया, "यहाँ पहले से ही अरीबिया (अरब) के व्यापारी हमारे साथ व्यापार करते हैं। पिछले बार भी वासु दा के आने पर अरीबिया के व्यापारी *अलीब* बहुत नाराज़ हो गए थे। उन्हें लगता है कि भारतपुर में केवल उनका ही व्यापार होना चाहिए।" 


**अलमा दा का प्रस्ताव**


अलमा दा ने राजा को विश्वास दिलाते हुए कहा, "महाराज, मैं यहाँ पर एक छोटा सा किला बनाना चाहता हूँ ताकि मेरे लोग सुरक्षित रह सकें और व्यापार आसानी से हो सके। मैं आपको यह भी भरोसा दिलाता हूँ कि हम आपके नियमों का पालन करेंगे और इस धरती का सम्मान करेंगे।" 


राजा ज़मरिया ने सोचा कि शायद अलमा दा की बात सही है। दोस्ती में ईमानदारी और आपसी सहयोग से चीज़ें बेहतर बन सकती हैं। उन्होंने अलमा दा को अनुमति दे दी, और इस तरह पुर्तगालपुर के लोगों ने भारतपुर में एक छोटी सी जगह बसाई, जिससे वे आराम से व्यापार कर सकें। 


**एक नई शुरुआत**


अलमा दा ने राजा ज़मरिया से वादा किया कि वह हमेशा उनके अच्छे दोस्त की तरह उनके साथ खड़ा रहेगा। राजा ज़मरिया ने उसे अपनी ज़मीन पर किला बनाने की अनुमति दी, और इस तरह भारतपुर में पुर्तगालपुर का पहला किला बना – यह किला व्यापार और सुरक्षा का प्रतीक था।


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### **इस कहानी से बच्चों के लिए सीखने की बातें:**

1. **सच्ची दोस्ती और आपसी समझ का महत्व:** जब भी कोई नया दोस्त आए, तो उसे समझने की कोशिश करें और उसे अपना विश्वास दें।

2. **मिलजुल कर काम करने का लाभ:** नए दोस्तों के साथ मिलकर हम और भी बेहतर चीज़ें कर सकते हैं।

3. **कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखना और समझदारी से काम लेना:** अगर मुश्किलें आएँ, तो शांत मन से विचार करें, इससे मुश्किलें आसान हो जाती हैं।


### **अगली कहानी के लिए सवाल:**

अलमा दा और राजा ज़मरिया तो अच्छे दोस्त बन गए, लेकिन क्या अलीब और अरीबिया के व्यापारी इस नई दोस्ती को पसंद करेंगे? क्या वे इस बात से खुश होंगे कि अब पुर्तगालपुर के लोग भी भारतपुर में व्यापार कर सकते हैं? 


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### **अभिभावकों के लिए तथ्य:**


1. **वासु दा**: वास्तव में, वास्को डी गामा (Vasco Da Gama) भारत आने वाले पहले पुर्तगाली नाविक थे। हमने उन्हें कहानी में वासु दा का नाम दिया है।

2. **अलमा दा**: वास्को के बाद भारत आने वाले पुर्तगाली अफसर फ्रांसिस्को डी अल्मेडा (Francisco de Almeida) थे, जिन्हें हमने यहाँ अलमा दा के नाम से परिचित कराया है। अल्मेडा को भारत में पुर्तगाल का पहला वायसराय भी नियुक्त किया गया था।

3. **राफेल**: फ्रांसिस्को डी अल्मेडा का असली जहाज भी राफेल नाम से मशहूर था, जिसे हमने इस कहानी में भारतीय नामों के साथ जोड़ा है।

4. **अरीबिया के व्यापारी (अरब व्यापारी)**: उस समय अरब व्यापारी भारत के साथ प्रमुख व्यापार करते थे और भारत से मसाले और रेशमी कपड़े लेकर यूरोप में बेचते थे।

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